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Time Flies : My 15th work Anniversary with #teamamex

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  15 years ago, when I completed my master’s degree from IIIT-Hyderabad, I had three offers in hand from  #americanexpress ,  #ibm & Scientist Job with  #BARC (Bhabha Atomic Center), it was not clear from where I was going to start my professional career. While my family and elders suggested me to pick one of the most reputed job as Scientist with BARC (love towards govt sector job, job stability and many other factors), I was very keen towards joining Amex because of my core inclination towards Databases (my favorite subject during BTech and specialization course during MTech).    Finally, after many rounds of brainstorming and discussion with variety of people (Family, Friends, Teachers, Seniors, and mentors) I chose to go ahead with my love and passion towards #DATA and landed to #AmericanExpress family and now after 15 years I must say that even back then, I had ability to make correct decisions    This journey from a...

लोफ़ो, लॉकडाउन और हज़रतगंज !

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लखनऊ अब लोफ़ो के लिए नया नहीं रहा, पिछले कुछ महीनों में लोफ़ो ने इस नवाबी शहर में लगभग ५०० कि.मी. के सैर की है।  आइए आज मैं और लोफ़ो आपको “दिले-ए-लखनऊ-हज़रतगंज” की यात्रा पे ले चलते हैं |  #lofo #ganj #lockdown #Lucknow #awadh #Corona जिस गंज पे हर लखनऊ वाले का दिल धड़के, ना थी इतनी सूनी और शांत उस गंज की सड़के ! अगर कनॉट प्लेस दिल्ली का दिल है तो हज़रतगंज लखनऊ की धड़कन ! आज का हज़रतगंज पुरानी नवाबी नज़ाकत और आधुनिकता का अनोखा संगम है ! जो चाहिए वो मिलेगा यहाँ, चाहे सैर सपाटा हो या शॉपिंग या फिर फ़िल्म और खान पान, हर उम्र और वर्ग के लिए । लखनऊ के मध्य में बसा लगभग हज़रतगंज २०० साल से भी ज़्यादा पुराना है, इस मार्केट की स्थापना १८२७ में नवाब “नासिर उद दीन हैदर” ने चाइना बाज़ार और कप्तान बाज़ार नीव रख कर की थी, जहाँ कई बाहरी देशों से आया हुआ समान बिकता था ।  १८४२ में इसका नाम हज़रतगंज पड़ा, तब के नवाब “अमजद अली शाह”के नाम पर, जिनको सम्मान से “हज़रत” नाम से जाना जाता था ! तब के हजरतगंज में मुग़ल क़ालीन निर्माण शैली की छाप थी, १८५७ में ब्रिटिश हुकूमत ने हज़रतगंज का पुनर...

लोफो और लखनऊ रिवर फ्रंट !

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एक सुबह लोफ़ो (मेरी साइकल) मुँह फुलाए बैठी थी,जब मैं ने नाराज़गी का कारण पूछा तो लोफ़ो ने बताया कि अब तक मैंने उसको पुराना लखनऊ और खंडहर जैसी इमारतें ही दिखायीं है,लखनऊ में सब पुराना ही है क्या ? मैं मुस्कुराया और बोला नहीं रे.... चल तुझे नया वाला लखनऊ दिखता हूँ.. फिर क्या था, साइकल और सवार 🚴🏻‍♂️दोनों निकल पड़े एक नयी दिशा में कुछ और फ़ोटो वाले अनुभव जुटाने, मंज़िल थी - गोमती रिवरफ़्रंट और आस पास का नया बसा खूबसूरत इलाक़ा, आइए लोफ़ो के साथ आपको भी नए लखनऊ की कुछ झलक दिखता हूँ..  #Lucknow   #Awadh २००५ में उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ से बाहर निकला और अब तक बाहर ही हूँ, क्योंकि घर और माता-पिता यहीं हैं इसलिय लखनऊ से कभी दूर नहीं रहा, साल में ६-७ बार आना ज़रूर होता है.. और इन १५ सालों में ये नया इलाक़ा बेहद ही खूबसूरत तरीक़े से लखनऊ की शान में चार चाँद लगाने के लिए गढ़ा गया है| आगे बढ़ते बढ़ते लोफ़ो अचानक से गोमती नदी की तरफ़ देखते-देखते मानो ठिठक सी गयी और बोली कि पहले तो नदी के किनारे कच्चा रास्ता था अब ये हरियाली कैसी आ गायी और सुबह सुबह इतने लोग यहाँ चहलक़दमी क्यूँ कर रहे हैं भ...